देशप्रेम का पाठ सही , मैं पढ़ा नहीं सकता
मजलूमों के दुःख-दर्द को बाट नहीं सकता
देश की तरक्की के लिए सोच नही सकता
दहेज़ प्रथा खुदके घर में तक रोक नहीं सकता
पैचान कौन? कौन हूँ मैं?
क्या कहा , गद्दार हूँ?
क्या कहा , देशद्रोही हूँ?
सभामंचों पर देशप्रेम के गीत गता हूँ
पर समाज में धर्म की दीवार बनता हूँ
विपदा में लोगों को देख , मैं मुंह फेरता हूँ
विदेशी माल की दिन-रात मैं माला जपता हूँ
पैचान कौन? कौन हूँ मैं?
क्या कहा गद्दार हूँ?
क्या कहा. देशद्रोही हूँ?
.....
देशप्रेम है मेरे लिए बस "सेमिनार" का एक "सैशन "
या है वो फैन्सी-ड्रेस का कोई "आईटम !"
जवानों के हाल की मुझे न कोई "टेंशन "
मुझे तो बस चैनलों पर चाहिए
हर हाल में "अटैंशन" !
ठीक पहचाना -
हाँ मैं देशद्रोही हूँ
हाँ मैं गद्दार हूँ
नेता के लिबास में
अब रावण का अवतार हूँ .. !
